सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एडवोकेट नितिन कुमार नायक ने छात्राओं को संविधान प्रदत्त अधिकारों के प्रति किया जागरूक
सिसवा बाजार, महराजगंज।
“जिस दिन भारत की प्रत्येक बेटी अपने संवैधानिक अधिकारों को जान जाएगी, उसी दिन अन्याय, भेदभाव और शोषण के विरुद्ध उसकी सबसे बड़ी शक्ति स्वयं उसका ज्ञान होगा।” इसी प्रेरक संदेश के साथ सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एडवोकेट नितिन कुमार नायक ने चोखराज तुलस्यान सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, सिसवा बाजार की छात्राओं को भारतीय संविधान द्वारा महिलाओं को प्रदत्त अधिकारों का विस्तृत एवं व्यावहारिक ज्ञान कराया।
विद्यालय परिसर में आयोजित “महिलाओं के संवैधानिक अधिकार एवं विधिक जागरूकता” विषयक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान ने महिलाओं को केवल समानता का आश्वासन ही नहीं दिया है, बल्कि उनके सम्मान, सुरक्षा और आत्मगौरवपूर्ण जीवन को भी संवैधानिक संरक्षण प्रदान किया है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि संविधान का अनुच्छेद 14 प्रत्येक महिला को कानून के समक्ष समानता का अधिकार देता है। इसलिए कोई भी महिला स्वयं को किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम न आँके और न ही किसी प्रकार का अन्याय चुपचाप सहन करे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 15 लिंग के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को प्रतिबंधित करता है तथा महिलाओं के हित में विशेष प्रावधान बनाने की अनुमति देता है। यही कारण है कि आज महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान के लिए अनेक विशेष कानून प्रभावी रूप से लागू हैं।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 16 प्रत्येक महिला को सरकारी सेवाओं एवं रोजगार में समान अवसर प्रदान करता है। यदि किसी योग्य महिला के साथ केवल महिला होने के कारण भेदभाव किया जाता है, तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का पूर्ण अधिकार रखती है।
छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 19 प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है। बेटियों को अपनी बात निडर होकर रखने का अधिकार है। समाज के भय या दबाव में अपनी आवाज़ दबाना समाधान नहीं है। वहीं अनुच्छेद 21 प्रत्येक महिला को गरिमा, सम्मान, निजता और सुरक्षित जीवन का मौलिक अधिकार देता है। किसी भी महिला के सम्मान के साथ खिलवाड़ केवल सामाजिक अपराध ही नहीं, बल्कि संविधान की मूल भावना के भी प्रतिकूल है।
शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 21(क) (21A) प्रत्येक बालक और बालिका के लिए शिक्षा के अधिकार की गारंटी देता है। शिक्षित बेटी अपने अधिकारों को समझती है, अपने कर्तव्यों का निर्वहन करती है और समाज को नई दिशा देने का सामर्थ्य रखती है।
उन्होंने आगे कहा कि संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में अनुच्छेद 39 समान कार्य के लिए समान वेतन तथा महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान की रक्षा की बात करता है, जबकि अनुच्छेद 42 महिलाओं के लिए मानवीय कार्य-परिस्थितियों और मातृत्व संरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश देता है। साथ ही अनुच्छेद 51(क)(ई) प्रत्येक भारतीय नागरिक का यह नैतिक दायित्व निर्धारित करता है कि वह महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध किसी भी प्रथा का विरोध करे और ऐसी कुरीतियों का परित्याग करे।
एडवोकेट नितिन कुमार नायक ने छात्राओं से कहा कि यदि उनके साथ कभी छेड़छाड़, घरेलू हिंसा, साइबर अपराध, भेदभाव, उत्पीड़न अथवा किसी भी प्रकार का अन्याय होता है, तो वे भयभीत होने के बजाय विधि द्वारा उपलब्ध उपायों का सहारा लें। पुलिस, महिला हेल्पलाइन, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, महिला आयोग तथा न्यायालय जैसी संस्थाएँ प्रत्येक पीड़ित महिला को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि “अधिकार तभी जीवंत होते हैं, जब नागरिक उन्हें जानता भी हो और आवश्यकता पड़ने पर उनका निर्भीकतापूर्वक प्रयोग भी करता हो।”
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने उत्साहपूर्वक अनेक प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने सरल भाषा में उत्तर देते हुए विधिक प्रक्रियाओं की जानकारी दी। उनके प्रेरक विचारों ने छात्राओं में आत्मविश्वास, जागरूकता और संविधान के प्रति सम्मान की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री निरंकार सिंह, गणित प्रवक्ता श्री मनोज पटेल, विद्यालय के भूतपूर्व छात्र एवं वर्तमान अध्यापक श्री बिहारी लाल यादव, हॉस्टल इंचार्ज श्री आदित्य त्रिपाठी, विद्यालय के भूतपूर्व छात्र श्री हृदय नारायण द्विवेदी सहित विद्यालय परिवार के शिक्षक एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि एक जागरूक, शिक्षित और आत्मसम्मान से परिपूर्ण बेटी ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है। संविधान ने महिलाओं को अधिकार दिए हैं; अब उन्हें जानना, उनका सम्मान करना और आवश्यक होने पर उनका निर्भीकतापूर्वक प्रयोग करना प्रत्येक बेटी का कर्तव्य भी है और शक्ति भी।
