नई दिल्ली। पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK/PoJK) में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान हुई हिंसा और प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग को लेकर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण नागरिकों के विरुद्ध की गई कार्रवाई गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का मामला है और इसकी निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच कराई जानी चाहिए।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में बड़ी संख्या में नागरिकों की जान गई तथा अनेक लोग घायल हुए। भारत का कहना है कि क्षेत्र के निवासियों ने भी स्वतंत्र जांच की मांग उठाई है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए आगे आना चाहिए।
भारत ने पाकिस्तान के एक वरिष्ठ नेता के उस बयान पर भी आपत्ति जताई, जिसमें प्रदर्शन कर रहे नागरिकों को “दुश्मन” बताया गया था। विदेश मंत्रालय का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध करने वालों के साथ इस प्रकार की भाषा और कार्रवाई स्वीकार्य नहीं मानी जा सकती।
आतंकवाद के मुद्दे पर भी भारत ने पाकिस्तान को घेरते हुए कहा कि पाकिस्तान के एक वरिष्ठ राजनीतिक पदाधिकारी के सार्वजनिक बयान से यह संकेत मिलता है कि जिन उग्रवादियों को पहले भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया गया, वही अब पाकिस्तान के लिए चुनौती बन गए हैं। भारत ने इसे आतंकवाद को संरक्षण देने की नीति के दुष्परिणाम का उदाहरण बताया।
विदेश मंत्रालय का यह भी कहना है कि PoK में चल रहे स्थानीय चुनावों का व्यापक विरोध देखने को मिला। महंगाई, प्रशासनिक समस्याओं और कथित भेदभाव के खिलाफ विभिन्न स्थानीय समूह लगातार आंदोलन कर रहे हैं, जिससे क्षेत्र में जन असंतोष स्पष्ट दिखाई देता है।
इस बीच कई स्थानीय संगठनों और विदेशों में रहने वाले कश्मीरी समुदाय के कुछ समूहों ने भी संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से हस्तक्षेप की मांग की है। भारत ने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा के लिए वैश्विक संस्थाओं को इस पूरे घटनाक्रम पर निष्पक्ष और पारदर्शी दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
(नोट: यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दावों और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। संबंधित पक्षों के अलग-अलग दृष्टिकोण हो सकते हैं और स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय पुष्टि अलग निष्कर्ष भी प्रस्तुत कर सकती है।)
हृदय नारायण की रिपोर्ट