मानव स्वास्थ्य के लिए प्रभावशाली समझी जाने वाली एंटीबायोटिक्स अब अपनी क्षमता तेजी से खो रही हैं। इसके पीछे मुख्य कारण उन बैक्टीरिया का बढ़ता प्रतिरोध है, जिनके खात्मे के लिए ये दवाएं विकसित की गई थीं। ये सूक्ष्मजीव अपने भीतर ऐसी प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न कर रहे हैं, जिससे दवाएं बेअसर साबित हो रही हैं और घातक “सुपरबग्स” उभर रहे हैं।
एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2021 में एंटीबायोटिक प्रतिरोध के कारण वैश्विक स्तर पर 11 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु हुई। गंभीर संक्रमण से निपटने के लिए प्राथमिक उपचार के रूप में इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक्स, अधिकांश मामलों में कारगर नहीं रहीं।
विशेष रूप से भारत इस समस्या से गंभीर रूप से प्रभावित देशों में से एक है। यहां सूक्ष्मजीव इस हद तक अनुकूलित हो चुके हैं कि आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं इन पर कोई असर नहीं डाल पा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ता प्रतिरोध मानव स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती है और इससे निपटने के लिए व्यापक स्तर पर कदम उठाने की आवश्यकता है।