सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर प्रशासनिक लापरवाही के मामले में बड़ा एक्शन लिया गया है। 2019 में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर वरिष्ठ पत्रकार श्री मनोज कुमार टिबडेवाल जी के मकान पर बुलडोज़र चलाने के मामले में डीएम, एडीएम समेत 26 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद की गई है।
क्या है मामला?
2019 में महाराजगंज में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर वरिष्ठ पत्रकार के मकान को गिरा दिया गया था। मकान गिराए जाने की इस कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट ने अवैध ठहराते हुए पीड़ित को न्याय दिलाने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि बिना नोटिस और वैधानिक प्रक्रिया के मकान गिराना पूरी तरह गैरकानूनी है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 6 नवंबर 2024 को इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने पीड़ित को 2 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश देते हुए दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि किसी भी संपत्ति को गिराने से पहले वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन होना चाहिए।
किनके खिलाफ दर्ज हुआ केस?
इस मामले में तत्कालीन डीएम अमरनाथ उपाध्याय, एडीएम कुंज बिहारी अग्रवाल समेत कुल 26 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। इसमें वर्तमान आईएएस, आईपीएस, पीसीएस, पीपीएस अधिकारी, पुलिस अधिकारी और अन्य विभागों के कर्मचारी शामिल हैं।
कौन-सी धाराओं में हुआ मामला दर्ज?
मामला गंभीर धाराओं में दर्ज किया गया है, जिनमें 147, 166, 167, 323, 504, 506, 427, 452, 352, 336, 355, 420, 467, 468, 471 और 120बी शामिल हैं। एफआईआर महाराजगंज के कोतवाली थाने में दर्ज हुई है।
विवेचना यूपी सीबीसीआईडी करेगी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस मामले की जांच जिला पुलिस नहीं करेगी। जांच का जिम्मा यूपी सीबीसीआईडी को सौंपा गया है। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही पाई गई, तो यह मामला सीबीआई को सौंपा जा सकता है।
शिकायतकर्ता ने क्या कहा?
शिकायतकर्ता ने कहा, “यह केवल मेरी लड़ाई नहीं थी, बल्कि हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा के लिए थी। मुझे खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया कि कानून सबके लिए समान है।”
राज्य सरकार पर भी जुर्माना
अदालत ने राज्य सरकार पर भी 25 लाख रुपये का दंडात्मक मुआवजा लगाया है। साथ ही, पीड़ित के मकान और अन्य सामानों का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।
निष्कर्ष
यह मामला देश में कानून और नागरिक अधिकारों के प्रति एक बड़ी मिसाल बन गया है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भविष्य में प्रशासनिक लापरवाहियों पर रोक लगाने का काम करेगा।
(रिपोर्ट: अबतक INDIA NEWS)