“16 घंटे की ड्यूटी के बाद थककर रुका ट्रेन ड्राइवर, दो घंटे तक अटकी कुंभ स्पेशल – यात्रियों में हड़कंप!”
प्रयागराज में महाकुंभ 2025 के दौरान तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे द्वारा लगातार विशेष ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रयागराज से हर कुछ मिनट में एक नई ट्रेन तीर्थस्थलों की ओर प्रस्थान कर रही है। इसी बीच एक कुंभ स्पेशल ट्रेन को मिर्जापुर तक पहुंचाने वाले लोको पायलट ने अत्यधिक कार्यभार और थकान का हवाला देते हुए ट्रेन को रोक दिया, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा।
शुक्रवार को प्रयागराज रामबाग स्टेशन से रवाना हुई कुंभ स्पेशल ट्रेन के लोको पायलट, नत्थूलाल, जब दोपहर 1:15 बजे निगतपुर स्टेशन पहुंचे, तो उन्होंने ट्रेन को वहीं रोक दिया। उन्होंने स्टेशन मास्टर को लिखित रूप में सूचित किया कि वे लगातार 16 घंटे से सेवा में हैं और अब आगे ट्रेन चलाने में असमर्थ हैं। इसके बाद उन्होंने रेलवे कंट्रोल रूम को जानकारी भेज दी और ट्रेन से नीचे उतर गए।
इस घटना के बाद यात्रियों में बेचैनी बढ़ गई और कई श्रद्धालु स्टेशन मास्टर कार्यालय पहुंचकर जानकारी लेने लगे। रेलवे अधिकारियों को जब इस स्थिति की सूचना मिली तो उन्होंने तुरंत उच्चाधिकारियों को सूचित किया।
पुलिस और रेलवे अधिकारियों ने संभाली स्थिति
घटना की गंभीरता को देखते हुए यह मामला वाराणसी जोन के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) पीयूष मोर्डिया तक पहुंचा। उन्होंने तुरंत मिर्जापुर पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया, जिसके बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने यात्रियों को समझाने का प्रयास किया और रेलवे प्रशासन से समन्वय बनाकर एक अन्य लोको पायलट को बुलाने की व्यवस्था की।
लगभग दो घंटे तक ट्रेन रुकी रही, जिससे श्रद्धालु असमंजस में रहे। अंततः दोपहर 3:25 बजे एक अन्य लोको पायलट के पहुंचने के बाद ट्रेन को वाराणसी के लिए रवाना किया गया।
महाकुंभ के लिए रिकॉर्ड संख्या में ट्रेनें संचालित
महाकुंभ 2025 के प्रमुख स्नान पर्व मौनी अमावस्या (29 जनवरी) को तीर्थयात्रियों की अभूतपूर्व भीड़ को देखते हुए रेलवे ने प्रयागराज रामबाग और झूंसी स्टेशनों से रिकॉर्ड संख्या में ट्रेनें चलाईं। वर्ष 2019 के कुंभ मेले में चार दिनों में केवल 36 मेला स्पेशल ट्रेनें चलाई गई थीं, जबकि इस बार मात्र एक दिन में 39 विशेष ट्रेनें संचालित की गईं।
मौनी अमावस्या के अवसर पर कुल 54 ट्रेनों का संचालन किया गया, जिनमें 39 मेले के लिए विशेष ट्रेनें, 12 नियमित ट्रेनें, दो रिंग रेल और एक लंबी दूरी की ट्रेन शामिल थी। अगले दिन यानी 30 जनवरी की शाम तक 32 और ट्रेनें विभिन्न गंतव्यों के लिए रवाना की गईं, जिससे तीर्थयात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा का अनुभव मिला।
रेलवे के नए बदलाव से तीर्थयात्रियों को सुविधा
गंगा नदी पर नए रेलवे पुल के निर्माण से झूंसी और प्रयागराज रामबाग स्टेशन तीर्थयात्रियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हुए हैं। इन स्टेशनों से प्रत्येक 25 मिनट पर ट्रेनें चलाई जा रही हैं, जिससे यात्रियों को कम प्रतीक्षा करनी पड़ रही है।
इसके अतिरिक्त, ट्रेनों के दोनों ओर इंजन लगाए गए हैं, जिससे इंजन रिवर्सल की आवश्यकता नहीं रही और ट्रेनों का संचालन अधिक कुशलता से किया जा सका। रेलवे प्रशासन ने इस बार अभूतपूर्व तैयारी की है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और वे सुगमता से अपने गंतव्य तक पहुंच सकें।
