September 24, 2026

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भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच होने वाला वार्षिक द्विपक्षीय सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ मंगलवार, 15 सितंबर से शुरू हो गया। इस बार का सैन्य अभ्यास 28 सितंबर तक चलेगा। अभ्यास में दोनों देशों की सेनाओं के लगभग 1,200 जवान हिस्सा ले रहे हैं।
अभ्यास का उद्घाटन उत्तराखंड के औली स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में किया गया। इसके साथ ही सैन्य प्रशिक्षण गतिविधियां उत्तराखंड के औली और राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज, बीकानेर में समानांतर रूप से संचालित की जा रही हैं।
दोनों देशों के करीब 600-600 सैनिक शामिल
इस संयुक्त प्रशिक्षण में भारतीय सेना और अमेरिकी सेना की लगभग समान संख्या में टुकड़ियां शामिल हैं। दोनों पक्षों के करीब 600-600 सैनिक विभिन्न सैन्य गतिविधियों में भाग ले रहे हैं।
अमेरिकी दल में अलास्का स्थित 11th Airborne Division के सैनिकों की भागीदारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इस इकाई को अत्यधिक ठंडे और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सैन्य अभियानों का अनुभव प्राप्त है। इसके अलावा अमेरिकी सेना की 3rd Multi-Domain Task Force (3MDTF) भी अभ्यास का हिस्सा है।
पहाड़ों में संयुक्त सैन्य अभियान पर जोर
‘युद्ध अभ्यास 2026’ का प्रमुख उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच संयुक्त अभियानों की क्षमता और आपसी समन्वय को बेहतर बनाना है। प्रशिक्षण के दौरान पर्वतीय और अर्ध-पर्वतीय क्षेत्रों में अभियान चलाने, सामरिक स्तर पर तालमेल और अलग-अलग सैन्य प्रणालियों को एक साथ संचालित करने का अभ्यास किया जा रहा है।
इस दौरान लॉन्ग-रेंज प्रिसिजन फायर यानी लंबी दूरी से लक्ष्य पर सटीक प्रहार करने की क्षमता तथा आधुनिक कमांड एंड कंट्रोल प्रणालियों के इस्तेमाल पर भी विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
पहली बार अमेरिकी MLIDS सिस्टम की भागीदारी
इस वर्ष के अभ्यास की प्रमुख विशेषताओं में आधुनिक काउंटर-ड्रोन तकनीक भी शामिल है। अमेरिकी सेना का MLIDS (Mobile Low, Slow, Small Unmanned Aircraft Integrated Defeat System) पहली बार इस अभ्यास के दौरान भारत में इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस प्रणाली के माध्यम से छोटे और धीमी गति से उड़ने वाले ड्रोन जैसे मानवरहित हवाई खतरों की पहचान, निगरानी, ट्रैकिंग और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता का अभ्यास किया जाएगा। इससे दोनों सेनाओं को तेजी से बदलते ड्रोन युद्ध के माहौल में संयुक्त कार्रवाई का अनुभव मिलेगा।
ऑटोनॉमस सिस्टम और आधुनिक युद्ध तकनीक पर प्रशिक्षण
अभ्यास में पारंपरिक सैन्य प्रशिक्षण के साथ-साथ ड्रोन, स्वायत्त प्रणालियों और आधुनिक युद्धक्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली तकनीकों को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य सैनिकों को तकनीक आधारित युद्ध परिस्थितियों में बेहतर समन्वय और निर्णय लेने के लिए तैयार करना है।
संयुक्त लाइव-फायर अभ्यास होगा अहम हिस्सा
‘युद्ध अभ्यास 2026’ के अंतिम चरण में दोनों देशों की सेनाओं द्वारा संयुक्त लाइव-फायर प्रदर्शन भी किया जाएगा। इसमें लंबी दूरी तक मार करने वाली फायरिंग प्रणालियों और रॉकेट प्रणालियों का संयुक्त इस्तेमाल प्रदर्शित किया जाएगा।
इससे दोनों सेनाओं के बीच फायर सपोर्ट, लक्ष्य निर्धारण, कमांड सिस्टम और वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में समन्वित कार्रवाई की क्षमता को परखा जाएगा।
‘ऑपरेशन पाथवेज’ से जुड़ा व्यापक सैन्य सहयोग
भारत-अमेरिका का यह अभ्यास दोनों देशों के व्यापक सैन्य सहयोग के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। इसे ‘ऑपरेशन पाथवेज’ जैसे व्यापक प्रशिक्षण एवं रणनीतिक सहयोग ढांचे से भी जोड़ा जाता है।
नियमित संयुक्त सैन्य अभ्यासों के माध्यम से, दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे की कार्यप्रणाली, संचार व्यवस्था और सैन्य तकनीकों को समझने के साथ-साथ संयुक्त अभियानों के लिए अपनी इंटरऑपरेबिलिटी को मजबूत करती हैं।
‘युद्ध अभ्यास 2026’ में पारंपरिक सैन्य कौशल के साथ ड्रोन और आधुनिक युद्ध प्रणालियों पर बढ़ता जोर इस बात को भी दर्शाता है कि भविष्य के युद्धक्षेत्र में तकनीक, सटीक मारक क्षमता और तेजी से सूचना साझा करने की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।