मध्य पूर्व संकट: पाकिस्तानी बंदरगाहों की चमकी किस्मत, क्या आर्थिक लाभ को स्थायी बना पाएगा इस्लामाबाद?
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री जलमार्गों में पैदा हुई अस्थिरता के बीच वैश्विक व्यापार जगत एक नए बदलाव का गवाह बन रहा है। मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी संघर्ष और हॉरम्यूज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के संकट ने जहां एक तरफ पारंपरिक समुद्री व्यापारिक मार्गों को बुरी तरह बाधित किया है, वहीं दूसरी ओर इसने पाकिस्तान के बंदरगाहों के लिए तरक्की के नए द्वार खोल दिए हैं। संकट के इस दौर में कराची बंदरगाह और पोर्ट कासिम को एक अप्रत्याशित व्यापारिक लाभ मिला है, जिससे पाकिस्तानी समुद्री क्षेत्र में रिकॉर्ड मुनाफे और माल ढुलाई (कार्गो हैंडलिंग) के नए कीर्तिमान स्थापित हुए हैं।
खाड़ी देशों का माल हुआ डायवर्ट, ट्रांसशिपमेंट में 120% का उछाल
आधिकारिक आंकड़ों और जानकारों के अनुसार, हॉरम्यूज जलडमरूमध्य में पैदा हुए गतिरोध के कारण खाड़ी देशों जैसे कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब जाने वाले कार्गो का रुख बड़े पैमाने पर पाकिस्तानी बंदरगाहों की तरफ मुड़ गया। इसके अलावा, ईरान के रास्ते आने वाले मध्य एशियाई देशों के माल को भी कराची पोर्ट पर उतारा गया। इस आपातकालीन बदलाव की बदौलत जून 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में पाकिस्तान के बंदरगाहों पर ट्रांसशिपमेंट गतिविधियों में 120 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
कराची पोर्ट ट्स्ट (KPT) के अध्यक्ष, रिटायर्ड रियर एडमिरल शाहिद अहमद ने इस बात की पुष्टि की है कि क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा को देखते हुए माल ढुलाई शुल्क में कटौती की गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। कराची बंदरगाह के 138 साल के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा मुनाफा और कार्गो प्रबंधन का रिकॉर्ड है, और चालू वित्तीय वर्ष में इसमें 10% की और वृद्धि होने की उम्मीद जताई जा रही है।
आर्थिक वृद्धि दर में ऐतिहासिक सुधार
पाकिस्तान शिप्स एजेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कैप्टन जावेद इकबाल के मुताबिक, साल 2020 से पाकिस्तान के जहाजरानी क्षेत्र (Shipping Sector) की वार्षिक विकास दर महज 2.5 से 3 प्रतिशत के बीच सिमटी हुई थी। लेकिन इस वैश्विक संकट के कारण बीते वित्तीय वर्ष में यह दर छलांग लगाकर 8.5 से 9 प्रतिशत तक जा पहुंची है। समुद्री मार्गों में आए इस व्यवधान ने पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति के महत्व को वैश्विक स्तर पर एक बार फिर साबित कर दिया है, क्योंकि कराची, पोर्ट कासिम और ग्वादर जैसे बंदरगाह हॉरम्यूज जलडमरूमध्य पर निर्भर रहे बिना पूरी दुनिया से संपर्क साधने में सक्षम हैं। इस बढ़े हुए व्यापार से बंदरगाहों पर काम करने वाले स्थानीय श्रमिकों की आय में भी बढ़ोतरी देखी गई है।
चुनौतियां और स्थायी लाभ का सवाल
हालांकि, समुद्री मामलों के विशेषज्ञ इस बात को लेकर सतर्क कर रहे हैं कि यह मौजूदा फायदा अस्थायी हो सकता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मैरीटाइम अफेयर्स की रिसर्च फेलो डॉ. नाजिया शेर का मानना है कि यदि पाकिस्तान इस अल्पकालिक उछाल को दीर्घकालिक और स्थायी व्यापारिक लाभ में बदलना चाहता है, तो उसे सिंगापुर और यूएई की तरह अपने बंदरगाहों को वैश्विक सप्लाई चेन से प्रभावी ढंग से जोड़ना होगा।
वर्तमान में पाकिस्तानी बंदरगाहों के विकास के रास्ते में कई बड़ी बाधाएं बनी हुई हैं:
कमजोर बुनियादी ढांचा (Infrastructure): बंदरगाहों के आसपास के इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है, जिससे व्यापार बढ़ने के बावजूद माल की त्वरित निकासी नहीं हो पाती।
सीमित डिजिटलीकरण (Digitization): आधुनिक तकनीकों और डिजिटल प्रणालियों के अभाव में कामकाज की गति अब भी धीमी है।
उच्च सेवा शुल्क (Service Charges): प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले यहां के बंदरगाहों पर परिचालन सेवाएं अब भी काफी महंगी हैं।
सुरक्षा संबंधी चिंताएं: कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को वैश्विक मानकों के अनुसार और मजबूत करने की आवश्यकता है।
निष्कर्ष
अमेरिका-ईरान संघर्ष और मध्य पूर्व के मौजूदा संकट ने पाकिस्तान को एक बेहतरीन आर्थिक अवसर जरूर दिया है। लेकिन क्या इस्लामाबाद अपनी आंतरिक कमियों को सुधारकर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों का भरोसा स्थायी रूप से जीत पाएगा? यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि देश अपने पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, लागत दक्षता और परिचालन क्षमता को कितनी जल्दी आधुनिक और सुलभ बनाता है।
*हृदय नारायण की रिपोर्ट *
